
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। बस्ती नगर पालिका: ‘ईओ’ को मिठाई खिलाओ, फुटपाथ पर दुकान लगाओ।।
बस्ती से विशेष रिपोर्ट | सूत्र
बस्ती नगर पालिका प्रशासन एक बार फिर से अपनी कार्यशैली को लेकर सवालों के घेरे में है। शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान की हकीकत क्या है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस जगह से कुछ दिन पहले जेसीबी और भारी पुलिस बल के साथ दुकानें हटाई गई थीं, आज वहां फिर से दुकानें सज गई हैं। और इस पुनरुद्धार के पीछे की वजह ने पूरे सिस्टम को शर्मसार कर दिया है।
📢क्या है पूरा मामला?
अभी कुछ दिन पहले ही दीवानी कचहरी चौराहे पर नगर पालिका के जिम्मेदारों ने बड़े दलबल के साथ ‘अतिक्रमण हटाओ’ अभियान चलाया था। पूजा स्वीट के सामने से सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर अतिक्रमण साफ किया गया और संदेश दिया गया कि शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाएगा। लेकिन यह अभियान केवल दिखावा साबित हुआ।
होली के त्यौहार के दौरान, उन्हीं दुकानदारों ने नगर पालिका के ईओ (अधिशासी अधिकारी) के पास पहुंचकर उन्हें मिठाई खिलाई। इसके बाद क्या हुआ, यह किसी से छिपा नहीं है। जिस जगह को ‘अतिक्रमण मुक्त’ घोषित किया गया था, वहां फिर से दुकानें सज गईं।
📢’बिरादरी’ का रसूख, प्रशासन बेबस
जब आम लोगों ने दोबारा दुकान सजने पर सवाल उठाया, तो दुकानदार का जवाब बेहद चौंकाने वाला था। दुकानदार ने खुलेआम कहा, “ईओ साहब हमारे खास हैं और हमारी ही बिरादरी के हैं। अब देखता हूं कि कौन हमारी दुकान हटाता है।”
यह बयान सीधे तौर पर सरकारी पद पर बैठे अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। क्या नगर पालिका का संचालन अब जनता की सुविधा के लिए न होकर ‘बिरादरी’ और ‘मिठाई’ के लेनदेन पर आधारित हो गया है?
📢जिम्मेदार मौन क्यों?
इस पूरे प्रकरण पर जब नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि से पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उनका मोबाइल फोन बंद मिला या कॉल रिसीव नहीं हुआ। आखिर जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस भ्रष्टाचार और मनमानी पर मौन क्यों हैं?
नगर की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या नगर पालिका का बुलडोजर केवल गरीबों की रोजी-रोटी छीनने के लिए है, या फिर ‘मिठाई’ के बदले वहां पर नियम-कानून ताक पर रखकर अतिक्रमण को बढ़ावा दिया जा रहा है?
📢अध्यक्ष प्रतिनिधि का ‘साइलेंस मोड’
नगर की जनता जानना चाहती है कि जिस अध्यक्ष प्रतिनिधि के कंधों पर शहर को संवारने की जिम्मेदारी है, वे इस पूरे तमाशे पर मौन क्यों हैं? इस गंभीर मामले पर उनका फोन ‘आउट ऑफ रीच’ होना किसी बड़ी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
🔥जनता के सवाल: * क्या अब सरकारी जमीन का आवंटन ‘मिठाई’ के वजन से तय होगा?
🔥क्या ईओ साहब का कार्यालय अब ‘जन सेवा’ का नहीं, ‘बिरादरी सेवा’ का अड्डा बन चुका है?
🔥नगर पालिका प्रशासन अपनी विश्वसनीयता खोने के बाद अब जनता को क्या जवाब देगा?
चेतावनी: यदि नगर प्रशासन की नींद अब भी नहीं खुली, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह मिलीभगत सीधे तौर पर ऊपर तक है। शहर की जनता अब प्रशासन के इस ‘दोहरे चरित्र’ को पहचानने लगी है।














